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8.7.09

गोरखपुर में मज़दूर नेताओं पर मिल मालिकों का क़ातिलाना हमला

उत्तर प्रदेश में नोएडा से लेकर तक गोरखपुर तक श्रम कानूनों का कोई मतलब नहीं रह गया है और मज़दूर बुनियादी अधिकारों से भी वंचित हैं। इनके विरोध में आवाज़ उठाते ही मैनेजमेंट और प्रशासन का गँठजोड़ मज़दूरों के दमन पर उतारू हो जाता है। अगर इन घटनाओं पर फौरी कार्रवाई नहीं की गई तो स्थिति विस्फोटक होने से इंकार नहीं किया जा सकता।
गोरखपुर में आज सुबह जब वी.एन. डायर्स की कपड़ा मिल के मज़दूर कारखाना गेट पर मीटिंग करने के बाद लौट रहे थे तो मिल मालिक, उसके बेटे और कंपनी के कुछ कर्मचारियों ने उन पर जानलेवा हमला किया। शुरू से आन्दोलन में अहम भूमिका निभा रहे बिगुल मज़दूर दस्ता के कार्यकर्ताओं को उन्होंने खास तौर पर निशाना बनाया। मिल मालिक ने अपनी पिस्तौल के कुन्दे से मार-मारकर बिगुल मज़दूर दस्ता के उदयभान का सिर बुरी तरह फोड़ दिया जबकि प्रमोद को कारखाने के भीतर ले जाकर लोहे की छड़ों और डण्डों से बुरी तरह पीटा गया। हमले में कई मज़दूर भी घायल हो गये।
दरअसल, गोरखपुर के बरगदवा इलाके के तीन कारखानों -- अंकुर उद्योग लि., वी.एन. डायर्स एंड प्रोसेसर्स धागा मिल तथा कपड़ा मिल में विगत लगभग एक माह से मज़दूर अपनी जायज़ माँगों को लेकर आन्दोलनरत थे। पिछले सप्ताह दो कारखानों में मज़दूरों की प्रमुख माँगें मान ली गयी थीं लेकिन वी.एन. डायर्स की कपड़ा मिल के मज़दूरों की माँगों पर मालिक अड़ियल रवैया अपनाये हुए थे।
बिगुल मज़दूर दस्ता, दिल्ली मेट्रो कामगार संघर्ष समिति तथा बादाम मज़दूर यूनियन ने गोरखपुर में बिगुल मज़दूर दस्ता से जुड़े मज़दूर नेताओं पर कातिलाना हमले की कड़ी निन्दा करते हुए उत्तर प्रदेश सरकार से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है।

1 कमेंट:

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi July 8, 2009 at 7:21 PM  

श्रम कानूनों का कहीं कोई अर्थ नहीं रह गया है। श्रम विभाग और पुलिस दोनों मालिकों की रक्षा में सन्नद्ध खड़े रहते हैं।

बिगुल के बारे में

बिगुल पुस्तिकाएं
1. कम्युनिस्ट पार्टी का संगठन और उसका ढाँचा -- लेनिन

2. मकड़ा और मक्खी -- विल्हेल्म लीब्कनेख़्त

3. ट्रेडयूनियन काम के जनवादी तरीके -- सेर्गेई रोस्तोवस्की

4. मई दिवस का इतिहास -- अलेक्ज़ैण्डर ट्रैक्टनबर्ग

5. पेरिस कम्यून की अमर कहानी

6. बुझी नहीं है अक्टूबर क्रान्ति की मशाल

7. जंगलनामा : एक राजनीतिक समीक्षा -- डॉ. दर्शन खेड़ी

8. लाभकारी मूल्य, लागत मूल्य, मध्यम किसान और छोटे पैमाने के माल उत्पादन के बारे में मार्क्सवादी दृष्टिकोण : एक बहस

9. संशोधनवाद के बारे में

10. शिकागो के शहीद मज़दूर नेताओं की कहानी -- हावर्ड फास्ट

11. मज़दूर आन्दोलन में नयी शुरुआत के लिए

12. मज़दूर नायक, क्रान्तिकारी योद्धा

13. चोर, भ्रष् और विलासी नेताशाही

14. बोलते आंकड़े चीखती सच्चाइयां


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