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1.5.10

मई दिवस का संदेश सुनो।


पूंजी की गुलामी से आजादी के लिए लड़ने का संकल्‍प लो।


मजदूर साथियो,

पहली मई दुनिया भर के मजदूरों का सबसे बड़ा त्‍योहार है, लेकिन अफसोस की बात है कि आज बहुतेरे मजदूरों को इस दिन के बारे में कुछ भी पता नहीं है।

आज से करीब सवा सौ साल पहले, एक मई, 1886 के दिन अमेरिका के शिकागो शहर के मजदूरों ने काम के घंटे आठ करने की मांग पर जबरदस्‍त लड़ाई छेड़ी थी। जालिम पूंजीपतियों ने उनके आंदोलन को कुचलने के लिए लाठियों और गोलियों का सहारा लिया और चार मजदूर नेताओं को फर्जी मुकदमों में फंसाकर फांसी दे दी थी। उसी संघर्ष की याद में सारी दुनिया में पहली मई को मजदूर दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस दिन सभी मजदूर पूंजी की गुलामी की बेडि़यों को तोड़ने के लिए लड़ने का संकल्‍प लेते हैं।

मई दिवस उन शहीदों की कुर्बानियों को याद करने का एक मौका है, जिन्‍होंने अपनी जिंदगी देकर पूरी दुनिया के मजदूरों को यह संदेश दिया था कि उन्‍हें अलग-अलग पेशों और कारखानों में बंटे-बिखरे रहकर महज अपनी पगार बढ़ाने के लिए लड़ने के बजाय एक वर्ग के रूप में एकजुट होकर अपने राजनीतिक अधिकारों के लिए संघर्ष करना होगा। काम के घंटे कम करने की मांग उस समय की सबसे बड़ी राजनीतिक मांग थी।

मई दिवस के शहीदों की कुर्बानी बेकार नहीं गयी। जल्‍दी ही काम के घंटों की मांग पर संघर्ष की लहर की लहर पूरी दुनिया में फैल गयी। पूंजीपति वर्ग की सरकारें आठ घंटे काम के दिन का कानून बनाने के लिए मजबूर हो गयीं। यही नहीं, मजदूरों की जुझारू वर्ग चेतना से घबराई दुनिया के अधिकांश देशों की सरकारें श्रम कानून बनाकर किसी न किसी हद तक मजदूरों को चिकित्‍सा, आवास आदि बुनियादी सुविधाएं, तथा यूनियन बनाने का अधिकार देने, न्‍यूनतम मजदूरा तय करने और जब मर्जी रोजगार छीन लेने जैसी मालिकों की निरंकुश हरकतों पर बंदिशें लगाने के लिए मजदूर हो गयीं।

मगर पिछले 25-30 सालों के दौरान मजदूर आंदोलन की कमजोरी और बिखराव का फायदा उठाकर पूंजीपति फिर से मजदूरों पर हावी हो गए हैं। हमारे शहीद भाइयों ने अपना खून देकर जो हक हासिल किये थे वे एक-एक करके मजदूरों से छीन लिए गए हैं। आज फिर मजदूरों से 12-14 घंटे जानवरों की तरह काम कराया जाता है। न्‍यूनतम मजदूार, जॉब कार्ड, ईएसआई, साप्‍ताहिक छुट्टी जैसे बुनियादी अधिकार तक हमें नहीं दिये जाते। अपनी यूनियन बनाने का अधिकार भी हमसे छीन लिया गया है। सिर झुकाकर बैल की तरह काम में जुटे रहना, कदम-कदम पर अपमान सहना औ कभी भी निकाल दिए जाने के डर में जीना - यही है आज मजदूर की जिंदगी।

ऐसे में मई दिवस का दिन हमें याद दिलाने आया है - साथियो, गुलामी की नींद से जागो, मजदूर संघर्षों की शानदार विरासत को याद करो। मजदूर वर्ग हमेशा के लिए परास्‍त नहीं हुआ है। लड़ाई अभी जारी है। पहला दांव पूंजीपतियों का सफल हुआ है। लेकिन मुट्ठीभर लुटेरे जोर-जुल्‍म से करोड़ों-करोड़ मेहनतकश आबादी को हमेशा के लिए दबाकर नहीं रख सकते। आने वाले वर्षों में पूंजी और श्रम के बीच आखिरी जंग होगी जिसमें जीत मेहनतकशों की ही होगी। इसकी तैयारी हमें आज से ही करनी होगी। यही मई दिवस का संदेश है।

मई दिवस जिंदाबाद

इंकलाब जिंदाबाद

क्रांतिकारी अभिवादन के साथ

बिगुल मजदूर दस्‍ता

स्‍त्री मजदूर संगठन

की तरफ से जारी परचा

1 कमेंट:

कविता रावत May 1, 2010 at 3:28 PM  

आने वाले वर्षों में पूंजी और श्रम के बीच आखिरी जंग होगी जिसमें जीत मेहनतकशों की ही होगी। इसकी तैयारी हमें आज से ही करनी होगी। यही मई दिवस का संदेश है।

मई दिवस जिंदाबाद
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1. कम्युनिस्ट पार्टी का संगठन और उसका ढाँचा -- लेनिन

2. मकड़ा और मक्खी -- विल्हेल्म लीब्कनेख़्त

3. ट्रेडयूनियन काम के जनवादी तरीके -- सेर्गेई रोस्तोवस्की

4. मई दिवस का इतिहास -- अलेक्ज़ैण्डर ट्रैक्टनबर्ग

5. पेरिस कम्यून की अमर कहानी

6. बुझी नहीं है अक्टूबर क्रान्ति की मशाल

7. जंगलनामा : एक राजनीतिक समीक्षा -- डॉ. दर्शन खेड़ी

8. लाभकारी मूल्य, लागत मूल्य, मध्यम किसान और छोटे पैमाने के माल उत्पादन के बारे में मार्क्सवादी दृष्टिकोण : एक बहस

9. संशोधनवाद के बारे में

10. शिकागो के शहीद मज़दूर नेताओं की कहानी -- हावर्ड फास्ट

11. मज़दूर आन्दोलन में नयी शुरुआत के लिए

12. मज़दूर नायक, क्रान्तिकारी योद्धा

13. चोर, भ्रष् और विलासी नेताशाही

14. बोलते आंकड़े चीखती सच्चाइयां


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