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28.10.09

दैनिक हिन्‍दुस्‍तान में 'बिगुल' की चर्चा

आज (28/10/09) के दैनिक हिन्‍दुस्‍तान में प्रकाशित अपने कॉलम 'ब्‍लॉग चर्चा' में चर्चित पत्रकार और ब्‍लॉगर रवीश कुमार ने 'बिगुल' के ब्‍लॉग का विस्‍तृत उल्‍लेख किया है। साथ ही उन्‍होंने मुख्‍यधारा के मीडिया में मजदूरों और मजदूर आन्‍दोलनों की अनदेखी पर भी सवाल उठाया है। वे लिखते हैं कि मुख्‍यधारा के मीडिया में मजदूरों के मुद्दों के प्रति सहनशीलता खत्‍म होती जा रही है। मजदूरों के आन्‍दोलन खबर तभी बनते हैं जब वे कैमरों के लिए हंगामेदार और नजरें खींचने वाली तस्‍वीरें दे सकें। रवीश ने 'बिगुल' में प्रकाशित विभिन्‍न आन्‍दोलन और मजदूरों के शोषण की रिपोर्टों का भी जिक्र किया है। मजदूरों और मजदूरों के इस ब्‍लॉग की बातें व्‍यापक पाठक समुदाय तक पहुंचाने के लिए हम उनके आभारी हैं। उनका लेख पढ़ने के लिए नीचे दिये गये लिंक पर क्लिक करें :
http://blogonprint.blogspot.com/search/label/बिगुल

रवीश कुमार का ब्‍लॉग पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

2 कमेंट:

hemant October 28, 2009 at 8:23 PM  

bhai tapish allah kasam hum tumahre sath hai chingari ud gayi aag lagane me der nahi

devesh November 28, 2009 at 9:38 PM  

our movement is very secred not only for labours butalso for the downtroddens agril labours slumdwellers and those who are liv in villages and socially supperesseds and untouchabels.we should have incorporate the thoughts of voltare marx and rahul sankrityayans to improove and strenghthen the ideology of movement.

बिगुल के बारे में

बिगुल पुस्तिकाएं
1. कम्युनिस्ट पार्टी का संगठन और उसका ढाँचा -- लेनिन

2. मकड़ा और मक्खी -- विल्हेल्म लीब्कनेख़्त

3. ट्रेडयूनियन काम के जनवादी तरीके -- सेर्गेई रोस्तोवस्की

4. मई दिवस का इतिहास -- अलेक्ज़ैण्डर ट्रैक्टनबर्ग

5. पेरिस कम्यून की अमर कहानी

6. बुझी नहीं है अक्टूबर क्रान्ति की मशाल

7. जंगलनामा : एक राजनीतिक समीक्षा -- डॉ. दर्शन खेड़ी

8. लाभकारी मूल्य, लागत मूल्य, मध्यम किसान और छोटे पैमाने के माल उत्पादन के बारे में मार्क्सवादी दृष्टिकोण : एक बहस

9. संशोधनवाद के बारे में

10. शिकागो के शहीद मज़दूर नेताओं की कहानी -- हावर्ड फास्ट

11. मज़दूर आन्दोलन में नयी शुरुआत के लिए

12. मज़दूर नायक, क्रान्तिकारी योद्धा

13. चोर, भ्रष् और विलासी नेताशाही

14. बोलते आंकड़े चीखती सच्चाइयां


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