हालिया लेख/रिपोर्टें

Blogger WidgetsRecent Posts Widget for Blogger
Showing posts with label पावरलूम वर्कर्स. Show all posts
Showing posts with label पावरलूम वर्कर्स. Show all posts

22.5.11

मजदूरों या उनके प्रतिनिधियों को सूचना दिए बिना ही निपटा ली गई एकतरफा वार्ता

गोरखपुर: वीएन डार्यस-प्रशासन के बीच हुई वार्ता अवैधानिक

निकाले गए 18 मजदूरों को काम पर वापस रखने की मजदूरों की मुख्‍य मांग पर चर्चा तक नहीं हुई

14 मजदूर नेताओं ने जेल में आमरण अनशन जारी रखा

फैक्‍ट फाइंडिंग टीम की जांच पूरी, प्रथम दृष्‍टया प्रशासन की भूमिका को नकारात्‍मक बताया




नई दिल्‍ली, 22 मई। गोरखपुर मजदूर आंदोलन समर्थक नागरिक मोर्चा ने कल शाम वीएन डायर्स के मालिक विष्‍णु अजीत सरिया-श्रम विभाग-प्रशासन के बीच हुई वार्ता को अवैध एवं कानून विरोधी बताया है। मोर्चा ने कहा कि कल हुई इस एकतरफा वार्ता में मजदूरों के प्रतिनिधि शामिल नहीं थे। इससे स्‍पष्‍ट होता है कि गोरखपुर प्रशासन मालिकों के पक्ष में काम कर रहा है, क्‍योंकि मजदूरों या उनके प्रतिनिधियों को इस वार्ता की सूचना तक नहीं दी गई। मजदूरों के प्रतिनिधियों के बिना हुई यह वार्ता पूरी तरह अवैधानिक है और इसमें श्रमिकों की मुख्‍य मांग, अवैध रूप से निकाले गए 18 मजदूरों को काम पर वापस लेने, पर कोई चर्चा ही नहीं गई।

मोर्चा ने कहा कि मालिक और मजदूर मिलकर वार्ता कर सकते हैं लेकिन मालिक-श्रम विभाग-प्रशासन ने इस वार्ता से मजदूरों को बाहर रखकर खुद ही फैसला कर लिया कि मिल चालू की जाएगी। यही नहीं इस वार्ता में मालिक और प्रशासन से पूरी तरह गलतबयानी की है कि मजदूरों के कारण कारखानों में 30 अप्रैल से तालाबंदी है। सच्‍चाई यह है कि वीएन डायर्स के मालिकान ने 10 अप्रैल को ही कारखाने की बिजली कटवा दी थी और जबरन तालाबंदी कर दी थी। तभी से ताला खुलवाने के लिए मजदूरों की तरफ से लगातार प्रशासन तथा श्रम विभाग को ज्ञापन दिए जा रहे हैं। इसके बावजूद प्रशासन मालिकों के पक्ष में तथ्‍यों को तोड़-मरोड़ रहा है।

मोर्चा ने कहा कि यह एकतरफा फैसला किसी मजदूर को स्‍वीकार नहीं है। सभी मजदूर और संयुक्‍त मजदूर अधिकार संघर्ष मोर्चा चाहते हैं कि कारखाने चालू हों, लेकिन जब तक फैक्‍ट्री से निकाले गए 18 मजदूरों को काम पर नहीं रखा जाएगा तब तक एक भी मजदूर काम पर नहीं जाएगा। आज भी कार्यालय स्‍टाफ के एक-दो कर्मचारियों को छोड़कर कोई मजदूर फैक्‍ट्री में काम करने नहीं गया।

इस बीच जेल भेजे गए सभी 14 मजदूर नेताओं ने जेल में आमरण-अनशन शुरू कर दिया है। गौरतलब है कि पिछले 6 दिन से श्‍वेता और सुशीला देवी भी आमरण अनशन पर थे जिसके कारण उनकी हालत बिगड़ गई थी। इसके बावजूद उन्‍होंने जेल में भी आमरण अनशन शुरू कर दिया है। कल दो मुकदमों में दोनों को जमानत मिलने के बावजूद पुलिस द्वारा दायर किए गए तीसरे मुकदमे में उन्‍हें जमानत नहीं मिली और 12 अन्‍य मजदूर नेताओं के साथ उन्‍हें जेल भेज दिया गया था। सभी मजदूर नेताओं पर विभिन्‍न धाराओं में तीन-तीन फर्जी मुकदमे दायर किए गए हैं।

इधर, मजदूरों ने बरगदवा के कारखाना गेटों और मजदूर बस्तियों में सभाओं और प्रचार का सिलसिला तेज कर दिया है। शहर के नागरिकों तथा छात्रों-युवाओं-कर्मचारियों को भी प्रशासन की अंधेरगर्दी तथा मजदूरों की जायज मांगों से अवगत कराने के लिए आज से शहर में पर्चे बांटने शुरू कर दिए गए। इस अभियान को विस्‍तार देते हुए,कल से व्‍यापक जनसंपर्क शुरू कर दिया जाएगा। मोर्चा ने मालिकों की शह पर पुलिस द्वारा मकान-मालिकों पर मजदूरों को मकान से निकालने का दबाव बनाने की भी कड़ी निंदा की।

दूसरी ओर, अंकुर उद्योग लिमिटेड में दिनांक 3 मई को हुए गोलीकांड की देशव्यापी चर्चा एवं मजदूर आंदोलन सेसंबंधित घटनाओं की विभिन्न स्रोतों से जानकारी मिलने के पश्चात 19 मई को गोरखपुर पहुंची मीडियाकर्मियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की एक तथ्य अन्वेषण (फैक्ट फाइंडिंग) टीम ने जांच पूरी कर ली है। अपने तीन दिनी प्रवास के दौरान यह टीम एसपी सिटी, कमिश्नर, डीएलसी, संबंधित पुलिस अधिकारियों, विभिन्नमजदूर नेताओं, बुद्धिजीवियों, पत्रकारों, जनवादी अधिकारकर्मियों, एवं अंकुर उद्योग लि. तथा वी.एन. डायर्स केमजदूरों से मिली एवं पूरे घटनाक्रम पर विस्तार से बातचीत की। टीम जांच पूरी कर ली है एवं संबंधित तथ्य तथा दस्तावेज एकत्रित कर लिए हैं। जांच दल के सदस्यों का प्रथम दृष्टतया यह मत बना है कि अंकुरउद्योग लि. में हुई घटना एवं इस क्षेत्र के मजदूर आंदोलन के संबंध में प्रशासन की भूमिका नकारात्मक एवं आंदोलन विरोधी रही है। फैक्ट फाइंडिंग टीम अगले कुछ दिनों में अपनी विस्तृत रिपोर्ट तैयार करके प्रकाशित करेगी।



 गोरखपुर मजदूर आंदोलन समर्थक नागरिक मोर्चा 


कात्‍यायनी-09936650658, सत्‍यम-09910462009, संदीप-08447011935

ईमेल: satyamvarma@gmail.com, sandeep.samwad@gmail.com
 

Read more...

1.10.10

लुधियाना के पावरलूम मज़दूरों ने शानदार जीत हासिल की


कारखाना मज़दूर यूनियन के नेतृत्‍व में लुधियाना के गऊशाला, कश्‍मीर नगर और माधोपुरी इलाकों के पॉवरलूम वर्करों के आंदोलन को 15वें दिन (30 सितंबर) शानदार सफलता हासिल हुई। मज़दूरों की संगठित ताक़त के आगे मालिकान को आख़िर झुकना पड़ा। 26 फैक्‍टरियों के मालिकों का एक प्रतिनिधि समूह सहायक श्रम आयुक्‍त की मौजूदगी में मज़दूरों के प्रति‍निधियों के साथ बैठक करने के बाद अंतत: एक लि‍खित समझौते पर हस्‍ताक्षर करने को राजी हुआ। समझौते में पॉवरलूम मज़दूरों की विभिन्‍न श्रेणियों के पीस रेट/वेतन में 11-12 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी करने की बात स्‍वीकार की गई है। यह समझौता उन सभी 59 फैक्‍टरियों में लागू होगा जिनके मज़दूर हड़ताल में हिस्‍सा ले रहे थे। समझौते पर हस्‍ताक्षर हो जाने के बाद मज़दूरों ने अपनी 15 दिन पुरानी हड़ताल वापस लेने और 1 अक्‍टूबर से काम पर वापस लौटने का फैसला किया। 

कारखाना मज़दूर यूनियन के नेतृत्‍व में लुधियाना के पॉवरलूम वर्करों की सफल हड़तालों का यह तीसरा चरण है। इसके पहले शक्तिनगर, टिब्‍बा रोड की 42 पॉवरलूम फैक्‍टरियों के मज़दूरों ने 24 अगस्‍त से 31 अगस्‍त तक चली 8 दिन लंबी हड़ताल के बाद मालिकों को अपनी मांगो पर झुकने को मजबूर किया था। इसके बाद जिंदल टेक्‍सटाइल फैक्‍टरी में एक और सफल हड़ताल हुई। लुधियाना के मज़दूर आंदोलन के पिछले 18 वर्षों के इतिहास में यह पहला मौका है जब मालिकों की संगठित ताकत के आगे मज़दरों ने इतनी बड़ी सफलता हासिल की है। इन हालिया सफलताओं के बाद लुधियाना के मज़दूर आंदोलन में नई जागृति पैदा हुई है। वेतन बढ़ोत्तरी से ज़्यादा अहम तथ्‍य यह है कि मज़दूरों ने अब अपना एक ज़झारू संगठन बना लिया है। संगठन ही मज़दूरों का सबसे बड़ा हथियार है जो यह सुनिश्चित करता है कि समझौते को सही ढंग से लागू किया जाए और साथ ही यह मज़दूरों के जीवन और आजीविका को प्रभावित करने वाले तमाम मसलों पर उन्‍हें एकजुट करने का काम करेगा। 

क्रान्तिकारी अभिवादन के साथ, 

लखविंदर 

सचिव, कारखाना मज़दूर यूनियन

Read more...

22.9.10

गौशाला, कशमीर नगर, माधोपुरी के पावरलूम मजदूरों का संघर्ष -- श्रम कार्यालय पर कारखाना मजदूर यूनियन ने की विशाल अधिकार रैली

आज कारखाना मजदूर यूनियन ने गौशाला, कशामीर नगर, माधोपुरी आदि इलाकों के 50 से भी अधिक पावरलूम कारखानों के हड़ताली मजदूरों की माँगें मनवाने के लिए श्रम विभाग पर विशाल अधिकार रैली की। इस रैली में हड़ताल पर बैठे मजदूरों के अलावा लुधियाना के अन्य अनेकों कारखानों के मजदूर भी बड़ी संख्या में शामिल हुए। 16 अगस्त को इन इलाकों के 22 कारखानों में पीस रेट बढ़ौतरी और अन्य श्रम कानूनों को लागू करवाने की माँगों को लेकर हड़ताल शुरू हुई थी जो दिन-ब-दिन विशाल होती जा रही है। आज हड़ताल के छठे दिन तक हड़ताल में 52 पारवलूम कारखानों के मजदूर शामिल हो चुके हैं। मजदूरों ने प्रण किया है कि जब तक उनकी माँगें नहीं मान ली जातीं तब तक वे काम पर नहीं लौंटेंगे भले ही भूखे मरने की नौबत क्यों न आ जाए। 

रैली को सम्बोधित करते हुए कारखाना मजदूर यूनियन के प्रधान राजविन्दर ने श्रम विभाग और प्रशासन को चेतावनी दी है कि मजदूर की माँगें तुरंत मानीं जाए, नहीं तो यूनियन संघर्ष को और बड़े स्तर पर ले जाएगी। आज की अधिकार रैली में नौजवान भारत सभा (डा. परमिन्दर), बजाज सन्स कारखाना मजदूर यूनियन(धरमेन्द्र), मोल्डर एण्ड स्टील वर्कर्ज यूनियन (हरजिन्दर सिंह और विजय नारायण), लोक एकता संगठन (गल्लर चौहान), मजदूर चेतना मंच (शेर बहादुर), लोक मोर्चा पंजाब (कस्तूरी लाल), इंकलाबी केन्द्र पंजाब (जसवंत जीरख) आदि संगठनों ने शामिल होकर पावरलूम मजदूरों के संघर्ष का पुरजोर समर्थन करने का ऐलान किया। यूनियन के प्रधान राजविन्दर ने इंसाफपसंद संगठनों के साथ में आने का स्वागत किया और कहा कि संघर्ष अब और भी मजबूती के साथ लड़ा जाएगा। 

गौरतलब है कि पावरलूम मजदूरों की आमदनी में पिछले 10-12 वर्षों में कोई कहने लायक बढ़ौतरी नहीं हूई है जबकि इस दौरान महँगाई कई गुणा बढ़ गई है। इन कारखानों में श्रम कानून नाम की कोई चीज नहीं है। श्रम विभाग, पुलिस प्रशासन, सरकार की नाक के नीचे मालिक खुलेआम मजदूरों के संवैधानिक अधिकारों का हनन कर रहे हैं। इस सब के कारण मजदूरों की जिन्दगी नरक बन चुकी है। मजदूरों को मजबूरन हड़ताल का रास्ता चुनना पड़ा है। 

लखविन्दर, सचिव, कारखाना मजदूर यूनियन, मोबाइल-96461 50249

रैली की कुछ तस्‍वीरें और वीडियो के लिंक। पूरा वीडियो बाइट देखने के लिए इनके लिंक पर क्लिक करें।

रैली को सम्बोधित करते कारखाना मजदूर यूनियन के प्रधान राजविन्दर

श्रम विभाग पर प्रदर्शन करते पावरलूम मजदूर
वीडियो


 



Read more...

18.9.10

लुधियाना के पावरलूम वर्कर्स के आंदोलन का तीसरा दौर

दो सफल हड़तालों के बाद अब तीन दर्जन नए कारखानों में हड़ताल का तीसरा दिन। 


कारखाना मजदूर यूनियन की अगुवाई में लुधियाना के गऊशाला, कशमीर नगर, माधोपुरी आदि इलाकों के करीब तीन दर्जन पावरलूम कारखानों के मजदूरों की हड़ताल ने आज तीसरे दिन में प्रवेश किया। लुधियाना के पावरलूम करखानों के सैकड़ों मजदूर पीस रेट/वेतन बढ़ोत्तरी और अन्‍य बुनियादी अधिकारों को लागू करने के लिए एक संघर्षपूर्ण हड़ताल पर बैठे हैं और उनका प्रण है कि वे तब तक हड़ताल से नहीं उठेंगे जबतक कि उनकी मांगे मान नहीं ली जातीं।
लुधियाना के पावरलूम कारखाने मजदूरों के शोषण के लिए कुख्‍यात हैं। इन कारखानों में ज्‍यादातर पुरबिया मजदूर काम करते हैं जिन्‍हें कारखाना मालिक इंसान ही नहीं समझते। इन कारखानों में किसी भी प्रकार का श्रम कानून लागू नहीं होता। पी.एफ., ईएसआई, जॉब कार्ड, हाजिरी रजिस्‍टर जैसी कोई चीज इन कारखानों में नहीं पाई जाती। मजदूरों को काम के बदले मिलने वाले पीस रेट में कई सालों से कोई बढ़ोत्तरी नहीं हुई है जबकि पिछले दो-तीन वर्षों में ही भोजन, आवास, दवा-इलाज, परिवहन जैसी हर बुनियादी आवश्‍यकता की चीजों में तीन-चार गुने की बढ़ोत्तरी हो चुकी है। स्‍थानीय श्रम विभाग पूरी तरह मालिकों की जेब में रहता है और बार-बार की शिकायतों के बावजूद श्रम विभाग और स्‍थानीय प्रशासन के कान पर जूं नहीं रेंगती। मालिकों के गुण्डों का खौफ लगातार मजदूरों के सिर पर बना रहता है।

इन परिस्थितियों से तंग आकर लुधियाना के मजदूरों ने कारखाना मजदूर यूनियन के नेतृत्‍व में संघर्ष की आवाज बुलंद कर दी है। इसकी शुरुआत 24 अगस्‍त को शक्तिनगर, टिब्‍बा रोड के 42 पावरलूम कारखानों के मजदूरों ने की और आठ दिन की हड़ताल के बाद उनकी जुझारू एकजुटता के सामने 31 अगस्‍त को मालिकों को आखिरकार झुकना पड़ा और उन्‍होंने मजदूरों की लगभग सभी मांगें मान लीं। यहां तक कि मजदूरों ने मालिकों को हड़ताल के दिनों का आधा वेतन देने के लिए भी मजबूर किया।  इसके बाद जिंदल टेक्‍स्‍टाइल नामके कारखाने में भी हड़ताल हुई और वहां भी उन्‍हें जीत हासिल हुई। लुधियाना के मजदूर आंदोलन के पिछले 18 वर्षों के इतिहास में यह पहला मौका था जब मजदूरों ने मालिकों की एकजुट ताकत के आगे कोई जीत दर्ज की थी। पिछले एक-डेढ़ दशक के दौरान मजदूरों ने कई बार बड़ी-बड़ी लड़ाइयां भी लड़ीं लेकिन हर बार पुरानी यूनियनों की गद्दारी के कारण आखिरकार मजदूरों को हार का मुंह देखना पड़ा। इस लिहाज से इस जीत का विशेष महत्व है और इसने मजदूरों में नए उत्‍साह का संचार किया है।

इन संघर्षों से सबक लेते हुए लुधियाना के अन्‍य क्षेत्रों (गऊशाला, कशमीर नगर, माधोपुरी आदि) के पावरलूम कारखानों के मजदूरों ने भी अपनी आवाज बुलंद कर दी है। कारखाना मजदूर यूनियन के रूप में उनके पास एक जुझारू और क्रांतिकारी यूनियन का समर्थन और नेतृत्‍व मौजूद है। मजदूरों ने यह सीखा है कि कारखाना मालिकों को झुकाने के लिए वे समझौतापरस्‍त, संशोधनवादी, नकली लाल झंडे वाली यूनियनों के भरोसे नहीं रह सकते। उन्‍हें एक क्रान्तिकारी यूनियन और फौलादी एकजुटता बनानी होगी। यही दो चीजें जीत की गारंटी दिला सकती हैं।

इस बीच गीतानगर में एक अन्‍य यूनियन के नेतृत्‍व में आंदोलन कर रहे मजदूरों पर पिछले सप्‍ताह मालिकों के गुण्‍डों ने कातिलाना हमला किया। इसमें करीब 50 मजदूर घायल हो गए। कारखाना मजदूर यूनियन ने प्रशासन से इस घटना की जांच करवाने और हमलावरों को सजा दिलाने की मांग की है। साथ ही मजदूरों ने मालिकों के किसी नए हमले का मुकाबला करने के लिए अपने सतर्कता दस्‍ते भी तैयार कर लिए। इन आंदोलनों की एक बहुत बड़ी सफलता यह है कि मजदूरों में मालिकों के गुण्‍डों और पुलिस का डर खत्‍म हो गया है। मोल्‍डर एवं स्‍टील वर्कर्स यूनियन लुधियाना ने भी पावरलूम मजदूरों की इस हड़ताल का समर्थन किया है। इसके साथ ही मजदूरों ने स्‍थानीय आबादी में भी पर्चे बांटकर नागरिकों को अपने जीवन व काम की असह्य परिस्थितियों और अपने आंदोलन के औचित्‍य के बारे में बताया है और इन्‍हीं परिस्थितियों में काम कर रहे लुधियाना के अन्‍य कारखानों के मजदूरों से भी समर्थन और आंदोलन में शामिल होने की अपील की है। मजदूरों ने श्रम विभाग के अधिकारियों को बताया कि उन्‍हीं की मेहनत की बदौलत वे मोटी-मोटी तनख्‍वाहें पाते हैं और अगर उन्‍होंने अपनी संवैधानिक जिम्‍मेदारी का भी निर्वाह नहीं किया तो मजदूर अपने आंदोलन को और तेज करेंगे।

Read more...

बिगुल के बारे में

बिगुल पुस्तिकाएं
1. कम्युनिस्ट पार्टी का संगठन और उसका ढाँचा -- लेनिन

2. मकड़ा और मक्खी -- विल्हेल्म लीब्कनेख़्त

3. ट्रेडयूनियन काम के जनवादी तरीके -- सेर्गेई रोस्तोवस्की

4. मई दिवस का इतिहास -- अलेक्ज़ैण्डर ट्रैक्टनबर्ग

5. पेरिस कम्यून की अमर कहानी

6. बुझी नहीं है अक्टूबर क्रान्ति की मशाल

7. जंगलनामा : एक राजनीतिक समीक्षा -- डॉ. दर्शन खेड़ी

8. लाभकारी मूल्य, लागत मूल्य, मध्यम किसान और छोटे पैमाने के माल उत्पादन के बारे में मार्क्सवादी दृष्टिकोण : एक बहस

9. संशोधनवाद के बारे में

10. शिकागो के शहीद मज़दूर नेताओं की कहानी -- हावर्ड फास्ट

11. मज़दूर आन्दोलन में नयी शुरुआत के लिए

12. मज़दूर नायक, क्रान्तिकारी योद्धा

13. चोर, भ्रष् और विलासी नेताशाही

14. बोलते आंकड़े चीखती सच्चाइयां


  © Blogger templates Newspaper III by Ourblogtemplates.com 2008

Back to TOP