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11.5.11

मज़दूरों के जुझारू संघर्ष और देशव्यापी जनदबाव से गोरखपुर में मजदूर आन्दोलन को मिली आंशिक जीत

अंकुर उद्योग से निकाले गए सभी 18 मज़दूर काम पर लिए गए, कारखाना कल से शुरू होगा
गोलीकांड के मुख्य अभियुक्तों की गिरफ्तारी, घायल मजदूरों को सरकार से मुआवजा दिलाने, फर्जी मुकदमे हटाने तथा न्यायिक जांच की मांग को लेकर आंदोलन जारी रहेगा
मांगें नहीं मानने पर शुरू हो जाएगा ‘मज़दूर सत्याग्रह’ का दूसरा चरण


पुलिस-प्रशासन के भारी दमन के बावजूद गोरखपुर के मजदूरों के जुझारू संघर्ष और एक सप्ताह से जारी दमन-उत्पीड़न की देशव्यापी निन्दा तथा व्यापक जनदबाव ने प्रशासन और मालिकान को कदम पीछे खींचने पर मजबूर कर दिया और वहां मजदूर आन्दोलन को आंशिक जीत हासिल हुई है।

कल ‘मज़दूर सत्याग्रह’ के लिए शान्तिपूर्ण ढंग से आयुक्त कार्यालय पर जा रहे मजदूरों पर शहर में जगह-जगह हुए लाठीचार्ज, गिरफ्तारी, सार्वजनिक वाहनों तक से उतारकर मजदूरों की पिटाई और महिला मजदूरों के साथ पुलिस के दुव्यर्वहार की चैतरफा भत्र्सना और सैकड़ों मजदूरों के टाउनहाल पर भूख हड़ताल शुरू कर देने के बाद प्रशासन भारी दबाव में आ गया था। अधिकारियों ने देर शाम हिरासत में लिए गए सभी मजदूर नेताओं और मजदूरों को रिहा कर दिया तथा मालिकों को वार्ता के लिए बुलाया था। कुछ मांगों पर मालिक की सहमति तथा आज औपचारिक वार्ता तय होने के बाद कल रात अधिकांश मजदूरों द्वारा भूख हड़ताल स्थगित कर धरना हटा लिया गया था लेकिन करीब 25 मजदूरों का जत्था भूख हड़ताल जारी रखे था।

आज उपश्रमायुक्त की मौजूदगी में मालिकों तथा मजदूरों के प्रतिनिधियों के बीच हुई वार्ता के बाद अंकुर उद्योग से निकाले गए सभी 18 मज़दूरों को काम पर वापस लेने तथा कारखाना कल से शुरू करने पर मालिक पक्ष सहमत हो गया। हालांकि वी.एन. डायर्स के दो कारखानों से निकाले गए 18 मज़दूरों को बहाल करने के सवाल पर अब भी गतिरोध बना हुआ है।

आन्दोलन का संचालन कर रहे संयुक्त मज़दूर अधिकार संघर्ष मोर्चा के अनुसार गोलीकांड के मुख्य अभियुक्तों की गिरफ्तारी तथा अभियुक्तों को बचाने वाले अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई, घायल मजदूरों को सरकार से मुआवजा दिलाने, मजदूरों पर थोपे गए सभी फर्जी मुकदमे हटाने, तथा गोलीकांड और 9 मई को ‘मज़दूर सत्याग्रह’ पर हुए बर्बर दमन की न्यायिक जांच की मांग को लेकर आन्दोलन जारी रहेगा। अगर ये मांगें नहीं मानी गयीं तो जल्दी ही ‘मज़दूर सत्याग्रह’ का दूसरा चरण शुरू किया जाएगा जो पहले से भी अधिक व्यापक होगा।

कल ‘मज़दूर सत्याग्रह’ के बर्बर दमन की देश-विदेश में कठोर भत्र्सना हुई है। देश भर से न्यायविदों, बुद्धिजीवियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और मजदूर आंदोलन से जुड़े लोगों ने उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री, राज्यपाल, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों तथा केन्द्र सरकार को सैकड़ों की संख्या में फैक्स, ईमेल, फोन तथा ज्ञापन भेजकर अपना विरोध दर्ज कराया है तथा दमन चक्र तत्काल रोकने, घटना की तुरंत न्यायिक जांच कराने, मजदूरों की जायज मांगे मानने और दोषियों की खिलाफ त्वरित कार्रवाई करने की मांग की है। पीयूसीएल एवं पीयूडीआर की ओर से जांच टीमें गोरखपुर भेजने की घोषणा की गयी है और वरिष्ठ पत्रकारों तथा सामाजिक कार्यकर्ताओं की कुछ स्वतंत्र जांच टीमें भी जल्दी ही तथ्यसंग्रह के लिए गोरखपुर जाएंगी।

सरकारी दमन तथा मालिक-प्रशासन-सांप्रदायिक ताकतों के गंठजोड़ द्वारा जारी अंधेरगर्दी के विरुद्ध भारी जन आक्रोश और व्यापक जनदबाव के कारण यह छोटी-सी जीत मिली है लेकिन गोरखपुर के मजदूरों के सामने अभी बहुत कठिन लड़ाई है और देशभर के इंसाफपसन्द नागरिकों तथा किसी भी मोर्चे पर काम करने वाले कार्यकर्ताओं को उनका साथ देना होगा। दमन-उत्पीड़न के तात्कालिक मसले पर मजूदरों को थोड़ी राहत मिली है लेकिन जिन बुनियादी मांगों को लेकर गोरखपुर में मजदूरों ने आवाज उठाई थी वे आज भी यथावत हैं। वहां के किसी भी कारखाने में कोई भी श्रम कानून लागू नहीं होता। न्यूनतम मजदूरी, काम के घंटे, जबरन ओवरटाइम, जाॅब कार्ड, ईएसआई जैसी बुनियादी सुविधाओं से भी मजदूर वंचित हैं। श्रम विभाग सब कुछ जानते हुए भी कुछ नहीं करता। जब तक इन मांगों पर ध्यान नहीं दिया जाएगा तब तक बीच-बीच में मजदूर असन्तोष का ज्वार फूटता ही रहेगा।

संयुक्त मज़दूर अधिकार संघर्ष मोर्चा ने यह भी चेतावनी दी है कि अगर मालिकों ने फिर से पहले की तरह वायदाखिलाफी और छलकपट से मजदूरों को उनके अधिकार से वंचित करने की कोशिश की या अगुआ मजदूरों को किसी भी तरह से प्रताडि़त करने की कोशिश की तो इसके नतीजे भुगतने के लिए उन्हें तैयार रहना होगा।

मोर्चा ने मजदूर आन्दोलन का भरपूर साथ देने तथा प्रशासन पर दबाव बनाने में मदद करने वाले न्यायविदों, पत्रकारों, बुद्धिजीवियों व सामाजिक कार्यकर्ताओं को धन्यवाद देते हुए गोरखपुर के मजदूरों को न्याय दिलाने के संघर्ष में सभी से आगे भी सहयोग की अपील की है।

कृते, 

गोरखपुर मजदूर आन्दोलन समर्थक नागरिक मोर्चा


संपर्क   9936650658 (कात्‍यायनी)  9910462009 (सत्‍यम) 8447011935 (संदीप)
ईमेल satyamvarma@gmail.com / sandeep.samwad@gmail.com

उपलब्‍ध तस्‍वीरें -












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7.5.11

गोरखपुर में मजदूरों पर फायरिंग तथा जिला प्रशासन के दमनात्मक रवैये की व्यापक निन्दा

न्यायविदों, बुद्धिजीवियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं तथा ट्रेड यूनियनकर्मियों ने मुख्यमंत्री से तत्काल हस्तक्षेप की माँग की

7 मई। गोरखपुर में गत 3 मई को मजदूरों पर हुई फायरिंग के बाद आज तक दोषियों पर कार्रवाई न होने और मजदूरों तथा मजदूर नेताओं के विरुद्ध प्रशासन के दमनात्मक रवैये की कठोर निन्दा करते हुए देशभर के वरिष्ठ न्यायविदों, बुद्धिजीवियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, मानवाधिकार कर्मियों और ट्रेडयूनियन नेताओं ने उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती से इस मामले में अविलम्ब हस्तक्षेप कर मजदूरों को इंसाफ दिलाने की माँग की है। ज्ञातव्य है कि इस घटना में 19 मजदूर गोली से घायल हो गये थे जिनमें से एक की हालत अब भी गंभीर बनी हुई है।

आज यहां राजकीय दमन के सवाल पर शुरू हुए राष्ट्रीय सेमिनार में भी यह मामला उठाया गया तथा जल्द से जल्द पीयूसीएल तथा अन्य संगठनों की एक संयुक्त जांच टीम गोरखपुर भेजने की घोषणा की गयी।

उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती के नाम भेजे ज्ञापन के माध्यम से घटना की न्यायिक जांच कराने सहित चार माँगे की गयीं हैं। ज्ञापन पर हस्ताक्षर करने वालों में प्रमुख रूप से न्यायमूर्ति राजिन्दर सच्चर, नर्मदा बचाओ आदोलन की मेधा पाटकर, पीयूसीएल के राष्ट्रीय अध्यक्ष डा. प्रभाकर सिन्हा, राष्ट्रीय महासचिव पुष्कर राज, ‘समयान्तर’ पत्रिका के सम्पादक पंकज बिष्ट, प्रख्यात फिल्मकार आनन्द पटवर्धन, प्रसिद्ध कवि एवं ‘पब्लिक एजेंडा’ के कार्यकारी संपादक मंगलेश डबराल, कवि पंकज सिंह, आल इंडिया सेक्युलर फोरम के राम पुनियानी, लखनऊ विश्वविद्यालय की पूर्व कुलपति डा. रूपरेखा वर्मा, लेखक-कवियत्री एवं ‘सृजन परिप्रेक्ष्य’ की संपादक कात्यायनी, जिला बार एसोसिएशन लुधियाना के अध्यक्ष अशोक मित्तल, डेमोक्रेटिक लॉयर्स एसोसिएशन पंजाब के कुलदीप सिंह एवं नरिन्दर सिंह, एमसीपीआई पंजाब के हरविलास सिंह, दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर ईश मिश्र, प्रोफेसर पीके विजयन, हैदराबाद विश्वविद्यालय के प्रोफेसर बी.आर. बापूजी एवं डा. शुभदीप, कोलकाता के इतिहासकार देवब्रत बनर्जी, पंजाबी विश्वविद्यालय के प्रो. गुरभगवान गिल, सीटीयू वर्कर्स यूनियन, चंडीगढ़ के भूपिन्दर सिंह, चंडीगढ़ सबआर्डिनेट सर्विसेज इंप्लाइज़ फेडरेशन के रंजीत सिंह, एआईसीटीयू पंजाब के खुशविन्दर संधू, लोकायत, पुणे के नीरज जैन, फोरम फॉर डेमोक्रेटिक स्ट्रगल के विजय सिंह, पीयूसीएल, उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष चितंरजन मिश्र एवं महासचिव वंदना मिश्र, प्रसिद्ध स्तंभकार एवं न्यू सोशलिस्ट इनिशिएटिव से जुड़े सुभाष गाताडे, इलाहाबाद उच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता कमलकिशोर राय, जन संस्कृति मंच दिल्ली की भाषा सिंह, नेशनल कैंपेंन अगेंस्ट करप्शन के प्रो. वाई.के. रंजन, सीपीआई-एमएल न्यू डेमोक्रेसी की दिल्ली सचिव अपर्णा, रिटायर्ड आईपीएस अधिकारी एस.आर. दारापुरी आदि शामिल हैं।

नई दिल्ली में 125वें मई दिवस की रैली में भाग लेकर लौटे मजदूरों पर गोलीबारी की घटना की विदेश में भी कड़ी निन्दा हुई है। जर्मनी की डेमोक्रेटिक सोशलिस्ट पार्टी की कार्यकारिणी के सदस्य इलियट आइज़नबर्ग एवं आई. ओ’कैलाघन, रैडिकल विमेन, आस्ट्रेलिया की डेबी ब्रेनन तथा रैडिकल विमेन, अमेरिका की प्रतिनिधि एन्ने स्लेटर, कनाडा की विल्फर्ड लॉरियर युनिवर्सिर्टी फैकल्टी एसोसिएशन के डा. हर्बर्ट पिमलॉट, इंग्लैंड की सामाजिक कार्यकर्ता क्रिस्टीन टिकनर, लेबर स्टार्ट के संपादक एरिक ली, मलेशिया की सोशलिस्ट पार्टी के जीविन द्रान, पाकिस्तान मजदूर महाज के तुफैल अब्बास सहित अनेक ट्रेड यूनियन कर्मियों तथा बुद्धिजीवियों ने इसे भारत के लोकतंत्र के लिए शर्मनाक घटना बताया है। 

वरिष्ठ लेखक कामतानाथ, अजय सिंह, ‘कथाक्रम’ के संपादक आईजी शैलेन्द्र सागर, ‘तद्भव’ के संपादक अखिलेश, मदन कश्यप, आर. चेतनक्रांति, आलोचक वीरेन्द्र यादव, जन संस्कृति मंच, लखनऊ की मुकुल सरल, ‘साझी दुनिया’ की अध्यक्ष मोहिनी मांगलिक, जनचेतना मंच, गोहाना के अध्यक्ष, डा. सी.डी. शर्मा, नैनीताल समाचार के सम्पादक राजीव लोचन शाह, वरिष्ठ रंगकर्मी सूर्यमोहन कुलश्रेष्ठ, इप्टा के राकेश पीयूसीएल उ.प्र. के राजीव यादव तथा शाहनवाज आलम, इलाहाबाद उच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता ताराचन्द एवं जीत बहादुर, जयपुर के नाट्यकर्मी आलोक कौशिक, दधीचि पटेल, पीपुल्स थिएटर चंडीगढ़ के सैमुअल जॉन, बीएआरसी, जयपुर के निसार अहमद, मुंबई के सामाजिक कार्यकर्ता चंद्रशेखरन नायर, पटियाला के सामाजिक कार्यकर्ता डा. प्यारे मोहन शर्मा, महिंद्रा सत्यम के गौरव बंसल, कारखाना मजदूर यूनियन, लुधियाना के राजविन्दर, टेक्सटाइल वर्कर्स यूनियन पंजाब के लखविन्दर सिंह, क्रांतिकारी लोक अधिकार संगठन के सूर्य प्रकाश, प्रसिद्ध पंजाबी लेखक मित्तर सैन मीत, कवि अशोक पांडे, दिल्ली के पत्रकार गौरव सोलंकी, भूपेन सिंह, अभिषेक श्रीवास्तव, सुयश सुप्रभ, प्रणव प्रियदर्शी, स्वतंत्र मिश्र, लोक सुरभि मंबई के संपादक विजय प्रकाश सिंह एवं वेद प्रकाश सिंह, गोरखपुर फिल्म समारोह के आयोजक पत्रकार मनोज सिंह, जन संस्कृति मंच, दिल्ली के रंजीत वर्मा, स्त्री मुक्ति लीग चंडीगढ़ की नमिता, नौजवान भारत सभा चंडीगढ़ की कमल, पंजाब युनिवर्सिटी, चंडीगढ़ में दिशा छात्र संगठन के राजिन्दर, जागरूक नागरिक मंच, इलाहाबाद के रमाशंकर, अनिरुद्ध एवं विजय कुमार, ‘संवेग’ के संपादक प्रसेन सिंह, स्त्री मुक्ति लीग की शालिनी, स्त्री मजदूर संगठन की विमला, दिशा छात्र संगठन के शिवार्थ, नौजवान भारत सभा के लालचन्द, सीटू लखनऊ के एस. बी. इन्दिरा, सीपीआई (एम) छोटे लाल पाल, लेनिन पुस्तक केन्द्र के गंगा प्रसाद, एसएफआई की कुसुम मिश्रा एवं अखिल विकल्प तथा राजस्थान, कर्नाटक, बिहार एवं अन्य राज्यों से आए नागरिक अधिकार कर्मियों और विभिन्न संगठनों के कार्यकर्ताओं सहित सैकड़ों व्यक्तियों ने हस्ताक्षर किए हैं।

इस बीच लखनऊ तथा गोरखपुर में विभिन्न संगठनों ने उत्तर प्रदेश में बढ़ते दमन-उत्पीड़न के खिलाफ साझा मोर्चा बनाकर व्यापक जनान्दोलन छेड़ने की तैयारी भी शुस् कर दी है। दिल्ली तथा पंजाब से कुछ जांच टीमें भी गोरखपुर जाने की तैयारी कर रही हैं।

मुख्यमंत्री को भेजे ज्ञापन में कहा गया है कि गोलीकांड के बाद से जो घटनाएं हुई हैं उनसे गोरखपुर में फैक्टरी मालिक-जिला प्रशासन गठजोड़ एकदम बेनकाब हो गया है। ज्ञापन में मांग की गई है किः

- निहत्थे मजदूरों पर गोलीबारी कराने वाले फैक्टरी मालिक और उसके भाड़े के गुण्डों के खिलाफ तुरंत कार्रवाई की जाए और उनपर मुकदमा चलाया जाए,

- इस पूरी घटना की की न्यायिक जांच करवाई जाए जिसमें स्थानीय प्रशासन और पुलिस की संलिप्तता की जांच भी शामिल हो और दोषी अधिकारियों को दण्डित किया जाए,

- मजदूरों के खिलाफ दर्ज फर्जी मुकदमे वापस लिए जाएं,

- सभी निलंबित 18 मजदूरों को बहाल किया जाए और दो फैक्टरी मालिकों द्वारा की गई गैरकानूनी तालाबंदी तुरंत समाप्त की जाए।


गोरखपुर मजदूर आन्दोलन समर्थक मोर्चा

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3.5.11

गोरखपुर में मज़दूरों पर गोलीबारी में कम से कम 20 मज़दूर घायल :: मालिकों और प्रशासन की मिली-भगत - पुलिस गुंडों को बचाने में लगी

दिल्‍ली में मई दिवस की रैली में भाग लेकर लौटे मज़दूरों पर बौखलाये मालिकों ने करवाया हमला

गोरखपुर (उ.प्र.) के बरगदवा औद्योगिक क्षेत्र की अंकुर उद्योग लि. नामक फैक्‍ट्री के मालिक द्वारा बुलाए गए गुण्‍डों ने आज (3 मई) सुबह मज़दूरों पर हमला किया। गुण्‍डों द्वारा की गई गोलीबारी से कम से कम 20 मज़दूर गम्‍भीर रूप से घायल हो गये हैं जिन्‍हें जिला अस्‍पताल में भरती कराया गया है।
यह हमला प्रशासन की पूरी मिली-भगत के साथ किया गया है। अंकुर उद्योग के मालिक ने सहजनवां क्षेत्र के कुख्‍यात हिस्‍ट्री शीटर प्रदीप सिंह और उसके गुंडों को भाड़े पर लेकर यह काम कराया है। मज़दूरों ने फैक्‍ट्री को घेर रखा है ताकि प्रदीप सिंह और उसके गुण्‍डे निकल कर भाग न सकें। पुलिस बल घटनास्‍थल पर पहुंच गया है और फैक्‍ट्री गेट पर मौजूद है लेकिन उसने अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की है। उन्‍होंने अब तक प्राथमिकी भी नहीं दर्ज की है। पुलिस की पूरी कोशिश है कि मज़दूरों को तितर-बितर करके गुंडों को वहां से निकाल दिया जाये। लेकिन मज़दूर वहां घेरा डाले हुए हैं।
अब तक 17 घायल मज़दूरों को ज़िला अस्‍पताल में भर्ती कराया गया है। उनके नाम हैं: 1. विनोद सिंह पुत्र श्री रामसरूप सिंह; 2. विरेन्‍द्र यादव पुत्र श्री मतिलाल यादव; 3. इन्‍द्रदेव पुत्र श्री बिलास दास; 4. अमित कुमार पुत्र श्री भूरे; 5. रमानन्‍द साहनी पुत्र श्री शीतला प्रसाद; 6. शैलेष कुमार पुत्र श्री रामाश्रय और 7. पप्पू जायसवाल, 8.रामजन्‍म भारत पुत्र श्री गुल्‍लू भारती, 9. विनय श्रीवास्‍तव पुत्र श्री तेज नारायण, 10. देवेंद्र यादव पुत्र श्री विजय नाथ, 11. विनोद दुबे पुत्र श्री केदारनाथ, 12. ध्रुव सिंह पुत्र श्री रामरूप सिंह, 13. श्रीनिवास चौहान पुत्र श्री बच्‍चा चौहान 14. संदीप मेहता पुत्र श्री बाबूलाल सिंह 15. राजेश गुप्‍ता पुत्र श्री लक्ष्‍मीकांत गुप्‍ता, 16. कृष्‍णकुमार पुत्र श्री रामकिशोर,17. शिवकुमार पुत्र श्री गिरजा राय, 18. देवेश सिंह पुत्र श्री भवानंद सिंह.
साफ तौर पर यह उद्योगपतियों की तरफ से एक सुनियोजित हमला है। कुछ दिन पहले से ही मीडिया में एक दुष्‍प्रचार अभियान शुरू किया गया था जिसमें कहा गया था कि अपने बुनियादी अधिकारों के लिए संघर्षरत मज़दूरों को बाहर से आये ''माओवादियों'' द्वारा भड़काया गया है। याद रहे कि दो साल पहले जब बरगदवा की 7 फैक्ट्रियों के मज़दूरों ने अपनी मांगों को लेकर एक संगठित आन्‍दोलन शुरू किया था उस समय भी इस प्रकार की अफवाहें फैलाने की कोशिश की गई थी। गोरखपुर के भाजपा सांसद योगी आदित्‍यनाथ फैक्‍ट्री मालिकों का खुले तौर पर समर्थन कर रहे हैं। वे शुरू से ही मज़दूरों के आन्‍दोलन का विरोध करते हुए मज़दूर नेताओं को ''हिंसा भड़काने पर तुले माओवादी'' कहते रहे हैं और पूरे मज़दूर आन्‍दोलन को यह कहकर बदनाम करते रहे हैं कि यह आन्‍दोलन ''चर्च के पैसे से चल रहा'' है।
गोरखपुर का प्रशासन खुलेआम फैक्‍ट्री मालिकों का पक्ष ले रहा है। गोरखपुर के कमिश्‍नर ने 5 दिन पहले ही बयान दिया था कि ''मज़दूरों को भड़काने वाले बाहरी तत्‍वों को बख्‍शा नहीं जायेगा और पुलिस उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई करेगी।'' यह बयान गीडा (गोरखपुर औद्योगिक विकास प्राधिकरण) के फैक्‍ट्री मालिकों की एक बैठक के तत्‍काल बाद आया जिसमें मालिकों ने प्रशासन से ऐसा करने के लिए कहा था। यहां तक कि उन्‍होंने तीन प्रमुख मज़दूर कार्यकर्ताओं तपिश मेंडोला, प्रमोद कुमार और प्रशान्‍त को ''माओवादी'' बताया था और उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई करने को कहा था। इन तीन कार्यकर्ताओं को पहले भी 2009 में फर्जी मामला बनाकर गिरफ्तार किया गया था और उन्‍हें तभी छोड़ा गया था जब गोरखपुर के ज़िला मैजिस्‍ट्रेट के कार्यालय पर आयोजित एक जबरदस्‍त जनप्रतिरोध ने प्रशासन को 4 दिन के लिए लगभग पंगु बना दिया।
उल्‍लेखनीय है कि गोरखपुर के उद्योगपति मज़दूर मांगपत्रक आन्‍दोलन के तहत दिल्‍ली में आयोजित मई दिवस की रैली में भाग लेने से मज़दूरों को रोकने के‍ लिए तरह-तरह के हथकण्‍डे इस्‍तेमाल कर रहे थे। झूठे मामलों में लगभग एक दर्जन मज़दूरों की गिरफ्तारी की गई थी और यहां तक कि वी एन डायर्स लिमिटेड नाम की एक फैक्‍ट्री में ताला बंदी कर दी गई थी। लेकिन मज़दूरों ने बड़ी संख्‍या में मई दिवस की रैली में भाग लेकर मालिकों को करारा जवाब दिया। गोरखपुर से लगभग 2000 मज़दूरों ने मज़दूर मांगपत्रक आन्‍दोलन के तहत मई दिवस की रैली में भाग लिया जिसमें देश के अलग-अलग हिस्‍सों से आये हज़ारों मज़दूरों ने भाग लिया था। इससे फैक्‍ट्री मालिकों और उनके राजनीतिक संरक्षक और भी बौखलाये हुए हैं और वे मज़दूरों को ''सबक़ सिखाने'' की कोशिश कर रहे हैं।
मीडिया के हमारे कुछ शुभचिन्‍तकों ने हमें सचेत किया है कि गोरखपुर का ज़िला प्रशासन मज़दूर नेताओं और अगुवा मज़दूरों को हिंसा की इस घटना में फर्जी ढंग से फंसाने और उन पर गम्‍भीर आरोप लगाकर उन्‍हें परिदृश्‍य से हटा देने की योजना बना रहा है ताकि आन्‍दोलन को कुचला जा सके।

हम आप सबसे अपील करते हैं कि फैक्‍ट्री मालिक और उसके गुण्‍डों को गिरफ्तार करने के लिए राज्‍य और ज़िला प्रशासन पर दबाव डालें और मज़दूर नेताओं को फर्जी मामलों में फंसाने से उन्‍हें रोकें। संबंधित अधिकारियों के फोन/फैक्‍स नंबरों और ईमेल आईडी की एक सूची नीचे दी गई है।

सत्‍यम

Some important phone numbers where you can call:  
Divisional Commissioner 2333076, 2335238 (off) 2336022 (Res) Fax: 2338817  
District Magistrate  0551 - 2334569 (Fax) Office of the District Magistrate
Collectrate Gorakhpur - 273001    
City Magistrate: Arun - 9450924888      
Dy Inspector General of Police 0551 - 2201187 / 2333442 Cantt.
Gorakhpur:   Dy. Labour Commissioner, Labour Office Civil Lines Gorakhpur-273001   DLC, ML Choudhuri - 9838123667   Km. Mayawati, Chief Minister Fifth Floor, Secretariat Annexe Lucknow-226001 0522 - 2235733, 2239234 (Fax)   2236181  2239296  2215501 (Phone: (Office)   2236838 2236985 Phone: (Res)    
Shri Badshah Singh, Labour Minister,  :   0522 - 2238925 (Fax)
Department of Labour Secretariat Lucknow    
Principal Secretary, Labour  0522 - 2237831 (Fax)
Department of Labour Secretariat Lucknow - 226001

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बिगुल के बारे में

बिगुल पुस्तिकाएं
1. कम्युनिस्ट पार्टी का संगठन और उसका ढाँचा -- लेनिन

2. मकड़ा और मक्खी -- विल्हेल्म लीब्कनेख़्त

3. ट्रेडयूनियन काम के जनवादी तरीके -- सेर्गेई रोस्तोवस्की

4. मई दिवस का इतिहास -- अलेक्ज़ैण्डर ट्रैक्टनबर्ग

5. पेरिस कम्यून की अमर कहानी

6. बुझी नहीं है अक्टूबर क्रान्ति की मशाल

7. जंगलनामा : एक राजनीतिक समीक्षा -- डॉ. दर्शन खेड़ी

8. लाभकारी मूल्य, लागत मूल्य, मध्यम किसान और छोटे पैमाने के माल उत्पादन के बारे में मार्क्‍सवादी दृष्टिकोण : एक बहस

9. संशोधनवाद के बारे में

10. शिकागो के शहीद मज़दूर नेताओं की कहानी -- हावर्ड फास्ट

11. मज़दूर आन्दोलन में नयी शुरुआत के लिए

12. मज़दूर नायक, क्रान्तिकारी योद्धा

13. चोर, भ्रष्‍ट और विलासी नेताशाही

14. बोलते आंकड़े चीखती सच्‍चाइयां


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